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  उबालने पर आधा बचा  जल  'उष्ण  जल ' कहलाता है। यह हमेशा लाभकारी होता है और त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) व उससे उत्पन्न रोगों को दूर करता है। इस  जल  के सेवन से मूत्र शुद्ध होता है तथा दमा, खाँसी, बुखार आदि दोष दूर होते हैं। रात्रि के समय इस  जल  को पीने से जमा हुआ कफ पिघलता है तथा वात एवं मल दोष जल्दी समाप्त होता है

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Importance of guduchi गुडूची कटुका तिक्ता स्वादुपाका रसायनी | संग्राहिणी कषायोष्णा लघ्वी बल्याऽग्निदीपनी | दोषत्रयामतृड्दाहमेहकासांश्च पाण्डुताम् ||८|| कामलाकुष्ठवातास्रज्वरकृमिवमीन्हरेत् | प्रमेहश्वासकासार्शःकृच्छ्रहृद्रोगवातनुत् ||९||

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