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 उबालने पर आधा बचा जल 'उष्ण जल' कहलाता है। यह हमेशा लाभकारी होता है और त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) व उससे उत्पन्न रोगों को दूर करता है। इस जल के सेवन से मूत्र शुद्ध होता है तथा दमा, खाँसी, बुखार आदि दोष दूर होते हैं। रात्रि के समय इस जल को पीने से जमा हुआ कफ पिघलता है तथा वात एवं मल दोष जल्दी समाप्त होता है

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